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Phayada


KYON- Dastan Khoj Ki

वर्षों से ऐसा होता आया है कि हम कई सारी चीजें ऐसी अनुसरण करते रहें हैं जिसके पीछे तर्क की कोई बुनियाद होती तक नहीं है।    यह ऐसी चीजें होती है जो हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में बस करते ही रहते हैं, बिना यह जाने कि आखिरकार हम यह कर क्यों रहे हैं! और जाहिर सी बात है इन तरह की बातों से समाज पर, हमारे खुद पर एक गलत प्रभाव पड़ना पूर्ण रूप से स्वभाविक है।

पर यदि हम एक थोड़ी सी सजगता, निम्न सजगता, भी दिखाएं और अगर हम थोडा सा प्रश्नात्मक हो इन अवधारणाओं से एक छोटा सा प्रश्न पूछे, "क्यों?"
इसका जवाब हमारे सामने उभरकर, खुलकर पूर्ण रूप से सामने आ जाएगा! #AskKyon

 ● जैसे कि यह सोचना कि हमारा भविष्य सिर्फ परीक्षा के अंको फल पर ही आधारित है!
- आज समाज में ऐसे उदाहरण ढूंढना कोई बड़ी बात नहीं है जिसमें एक वह व्यक्ति सफलता की कुर्सी पर बैठा है जो आज तक परीक्षा में अंकों फल के अनुसार  सबसे निम्न तल में था।
 उदाहरण के तौर पर कबीर दास, तुलसीदास,  सचिन तेंदुलकर इत्यादि  अनेक उदाहरण मौजूद हैं जो इस तथ्य को सत्यापित करते हैं। परीक्षा फल भले ही क्षण भर सुख दे दे लेकिन हमारा जीवन उस आधार पर निर्भर होता है कि हम कितने सुलभ तरीके से अपना जीवन यापन करते हैं।हमारा जीवन जीना हमारे पल- पल सजग रहने की प्रक्रिया पर निर्भर करता है, ना कि एक कागज के टुकड़े पर! एक कागज के टुकड़े पर हमारा भविष्य निर्भर! क्यों?

● यह अवधारणा की लड़कियां लड़कों से कमतर होती हैं!
- पुराने काल में यह अवधारणा थोड़ी बहुत समाज के अनुसार सही बैठती थी जहां पर मांसपेशी बल किसी भी कार्य को संपन्न करने में अहम भूमिका निभाता था। पर आज के जमाने में जहां मांसपेशी बल की अहमियत ही नहीं रह गई। सभी कार्यों की पृष्ठभूमि से बल का आधार हट सा हीं गया और सभी कार्यों का आधार बस तकनीक, विज्ञान और ज्ञान पर ही आधारित है। लड़का हो या लड़की, पुरुष हो या औरत सब इंसान हीं हैं और इसलिए सबों के मस्तिष्क की क्षमता भी बराबर हीं है तो किसी एक वर्ग- विशेष के लिए पक्षपात कर किसी एक वर्ग को घर के अंदर रखना! कमजोर समझना! कमजोर करना! क्यों? किस तरीके से सही है? क्यों?



यहां पर उदाहरण के तौर पर आपने देखा कि किस तरह से एक सजग, छोटा सा सवाल- "क्यों?" करने मात्र से एक गंभीर समस्या का भी कितना सरल सा हल निकल जाता है।
#SawalSeSamadhan
बस इसीलिए और गंभीर समस्याओं का समाधान निकालने के लिए इस प्रश्नों के शैली की भावना को तीव्र करने के लिए "क्यों?" प्रश्न करने के लिए! अपने अंदर सृजनात्मकता, रचनात्मकता; इस शैली को विकसित करने के लिए "क्यों- दास्तां खोज की" को पढ़ना उपयोगी सिद्ध हो सकता है।

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